आइए राम सेतु के बारे में कुछ विचित्र बाते जानते है जो आपने कभी सुनी नहीं होंगी 

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राम सेतु तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर रामेश्वरम और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मनालाल द्वीप के बीच चूना पत्थर से बनी एक श्रृंखला है।

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भौगोलिक साक्ष्य से पता चलता है कि किसी समय यह पुल भारत और श्रीलंका को भूमि मार्ग से जोड़ता था।

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हिन्दू पुराणों के अनुसार राम सेतु का निर्माण भगवान् श्री राम की वानर सेना ने किया था सेना के २ सैनिक जो वानर थे उनका नाम नल और नील  था मुख्यतः यह  उनके द्वारा बनाया  गया था

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कोरल और सिलिका पत्थर जब गरम हो जाता है तो उसमे हवा कैद हो जाती है जिससे वो हल्का हो जाता है

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और पानी में तैरने लगता है ऐसे पत्थर को चुनकर ही भगवान राम की वानर सेना ने इस सेतु को बनाया था

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राम सेतु को बनाने में ५ दिन का समय लगा था ४८ किलोमीटर लम्बा ये सेतु बनकर तैयार हो गया था 

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१५ वी शताब्दी तक लोग राम सेतु से पैदल और पारम्परिक वाहनों से रामेश्वरम से मनलाल द्वीप तक जाया करते 

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१४८० में आये एक तूफान की वजह से राम सेतु काफी हद तक टूट चूका था उस तूफान के समय जल स्तर इतना बढ़ गया था की रामसेतु पानी में डूब गया था 

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वैज्ञानिको ने भी इस बात की पुष्टि कर दी थी की भारत और श्रीलंका के बीच ये पथरो से बना रामसेतु आज भी मौजूद है जिसके बाद से सेतु समुन्दरम नहर योजना पर आज तक रोक लगी हुई है 

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