शोधकर्ता के मुताबिक, इस विशाल उल्का पिंड का वजन 15 टन है और इसमें उन्हें कई ऐसे खनिज मिले हैं, जो कभी नहीं देखे गए।

परिचय

Image credit pixabay.com

हैरान करने वाली बात यह है कि यह विशाल उल्कापिंड क्षुद्रग्रहों के निर्माण का रहस्य  खोजने में सफल हो सकता है

क्षुद्रग्रहों का निर्माण

Image credit unsplash.com

इस विशाल उल्कापिंड में खोजे गए दो खनिजों के नाम हैं- एल्किंस्टेंटोनाइट और एलालाइट

खनिजों के नाम

Image credit unsplash.com

खोजों के अनुसार, उल्कापिंड क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं, स्वयं चंद्रमा और अन्य ग्रहों से आते हैं या उत्पन्न होते हैं।

कहां से आते हैं ये उल्कापिंड

Image credit pixabay.com

इन्हें स्पेस रॉक्स भी कहा जाता है, ये पृथ्वी के वातावरण में चले जाते हैं और तेज गति से आते हुए जल जाते हैं।

उल्कापिंड के बारे में जानकारी

Image credit unsplash.com

वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद उल्का पिंड का कुछ भाग जल जाता है और  कुछ जीवित भाग पृथ्वी से टकरा जाता है,

उल्का पिंड किसे कहते हैं

Image credit pixabay.com

एक उल्कापिंड 2020 में पूर्वी अफ्रीका में सोमालिया में पाया गया अब तक का सबसे बड़ा नोवा उल्कापिंड था

उल्कापिंड 2020 में मिला

Image credit unsplash.com

शोधकर्ताओं ने इसे स्पेस रॉक कहा और इसका 70 ग्राम का टुकड़ा काटकर दो खनिजों की खोज की जो पृथ्वी पर पहले कभी नहीं पाए गए।

क्या हुआ शोध

Image credit pixabay.com

प्रोफेसर ने इन खनिजों के बारे में बताया कि ये विज्ञान के लिए नए हैं और इस उल्कापिंड में खोज के प्रयासों से और नए खनिज मिल सकते हैं।

क्रिस हेल्ड ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा

Image credit pixabay.com

यह उल्कापिंड सोमालिया में पाया गया था, और क्रिस हर्ड ने लिंडी एल्किन्स टैंटन के नाम पर दूसरे खनिज का नाम रखा

खानिजो के नाम कैसे बने

Image credit pixabay.com